SEBI रिटेल F&O ट्रेडर्स के लिए Suitability Test ला सकता है
SEBI रिटेल F&O ट्रेडर्स के लिए Suitability Test ला सकता है
फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स (F&O) ट्रेडिंग में हिस्सा लेने वाले रिटेल ट्रेडर्स को जल्द ही यह साबित करना पड़ सकता है कि वे इस हाई-रिस्क सेगमेंट के लिए आर्थिक और शिक्षिक रूप से तैयार हैं या नहीं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) एक "सूटेबिलिटी एक्सरसाइज" शुरू करने पर विचार कर रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेडर्स के पास डेरिवेटिव ट्रेडिंग में कदम रखने से पहले जरूरी ज्ञान और फंड्स हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, SEBI का सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी इस प्रस्ताव पर जल्द ही चर्चा करने वाली है। इस एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य यह है कि क्या रिटेल निवेशक F&O ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को समझते हैं। रेगुलेटर एक टेस्ट शुरू कर सकता है, जिसमें ब्रोकरेज फर्म्स ट्रेडर्स की योग्यता का मूल्यांकन करेंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SEBI डेरिवेटिव ट्रेडिंग की समझ को जांचने के लिए एक परीक्षा भी शुरू कर सकता है। पिछले साल, रेगुलेटर ने F&O वॉल्यूम को कम करने के लिए कदम उठाए थे, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग में गिरावट आई और एक्सचेंजों और ब्रोकर्स के राजस्व पर असर पड़ा।
SEBI द्वारा बदलाव किये गए F&O नियम और उनका प्रभाव-
- SEBI ने पहले ही F&O सेगमेंट को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 1 अक्टूबर, 2024 को, मार्केट वॉचडॉग ने निम्नलिखित प्रमुख उपाय शुरू किए:
- सप्ताहिक ऑप्शन एक्सपायरी को सीमित करना: अत्यधिक सट्टेबाजी को कम करने के लिए, प्रति एक्सचेंज सप्ताह में केवल एक ऑप्शन एक्सपायरी की अनुमति दी गई।
- अग्रिम प्रीमियम भुगतान: खरीदारों के लिए अग्रिम प्रीमियम भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है।
- सख्त इंट्राडे मॉनिटरिंग: एक्सचेंजों को दिन में कम से कम चार बार पोजीशन की जांच करनी होगी और लिमिट उल्लंघन पर जुर्माना लगाना होगा।
- इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए न्यूनतम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू बढ़ाना: ट्रेडिंग मानकों को बढ़ाने के लिए इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए न्यूनतम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 15 लाख रुपये कर दी गई है।
रिटेल ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?-
SEBI का यह कदम रिटेल ट्रेडर्स के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है। Suitability Test और नए नियमों का उद्देश्य अनुभवहीन ट्रेडर्स को F&O ट्रेडिंग के जोखिमों से बचाना है। हालांकि, इससे ब्रोकरेज फर्म्स और एक्सचेंजों के राजस्व पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है।
निष्कर्ष-
SEBI का यह प्रस्ताव F&O ट्रेडिंग को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिटेल ट्रेडर्स को अब इस हाई-रिस्क सेगमेंट में प्रवेश करने से पहले अपनी ज्ञान और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना होगा। यह न केवल निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि बाजार को भी अधिक स्थिर बनाएगा।
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